Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 46
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हिन्दी अर्थ
रूपशून्य,
नामशून्य, प्रकाशरूप, महदाकृति तथा स्वयं एक आत्ममात्र में स्थिति रखनेवाले मद्रूप आत्मा को ही
बार-बार नमस्कार है