Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 45
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हिन्दी अर्थ
विकारशून्य, नित्य, अंशशून्य, विशालतम,
सर्वस्वरूप तथा सर्वकालात्मक यानी सनातन मद्रूप आत्मा को ही बार-बार नमस्कार है