Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 44
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हिन्दी अर्थ
मैं ही आदि यानी भुवनों का कारण हूँ, मँ ही धाता
यानी धारणकरनेवाला हूँ, मैं चित्तस्वरूप हूँ, मैं भुवनस्वरूप हूँ, मेरा त्रिविधपरिच्छेद नहीं हो सकता,
ऐसे मद्रूप आत्मा को ही बार-बार नमस्कार है