Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 49
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हिन्दी अर्थ
चूँकि मन के समस्त विकल्प विनष्ट हो चुके हैं, इसलिए
सम और अत्यन्त अभिराम, समस्त विश्व का आविर्भाव करनेवाले, स्वतः विश्ववर्जित अनन्त, स्वरूप,
अजन्मा, जरारहित, समस्त गुणों से शून्य तथा अविनाशी ईश्वर के स्वरूप को मे प्रणाम करता हूँ