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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 82, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । विचार एवं विदुषा संवर्तेन कृतः पुरा । कथितो मम विन्ध्याद्रौ तेनैव विदितात्मना ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे महाबाहो, पूर्वोक्त प्रकार से भली प्रकार विचार के द्वारा भीतर से तत्त्वज्ञान को प्राप्तकर "आत्मा ही अवश्य ज्ञातव्य है” इसलिए विचार तत्त्व को जाननेवाले महात्मा लोग फिर चित्त के विषय में वक्ष्यमाणरीति से विचार करते हैं

सर्ग सन्दर्भ

अस्सीवाँ सर्ग समाप्त इक्यासीवाँ सर्म पूर्व में अनेक प्रयत्नों से देहरूपी घर से निर्वासित हुए चित्तरूपी वेताल की असत्ता का अनुभव और युक्ति से उपपादन ।