Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 81, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 81, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 81 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
जातोऽस्मि शान्तसंदेहः स्थितोऽस्मि विगतज्वरः ।
तथा तिष्ठामि तिष्ठामि तथैव विगतैषणम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे नेत्र, जब किसी की अपेक्षा किये बिना समस्त अर्थो के प्रकाशन में सदा
समर्थ परमात्मा रूप आदि विषयो में उदासीनस्वरूप से स्थित है, तब कालवश से यानी किसी समय
दीप आदि के प्रकाश को पाकर प्रकाशन कर रहे तुम अकेले ही क्यो सन्तप्त होते हो ?