Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 82, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
बाह्यानाभ्यन्तरांश्चैव स्पर्शान्परिजहत्क्रमात् ।
इदमाकलयामास मनसा विगतैनसा ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदाभासस्वरूप,
जीवस्वरूप से वर्जित, आदि ओर अन्त से शून्य, परमपावन पद को मे प्राप्त हुआ हूँ। मे सौम्य, सर्वत्र
व्यापक, अतिसूक्ष्म, सनातन आत्मस्वरूप से स्थित हूँ