Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 82, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
पञ्चद्वाराणि मनसश्चक्षुरादीन्यमून्यलम् ।
दग्धेन्द्रियाभिधानानि तावदालोकयाम्यहम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
तथोक्त इस भीतरी संकल्प-कलना का परित्याग करता हूँ, इस प्रकार का निश्चयकर
ॐकार के लक्ष्यभूत तुरीय आत्मा में मौन की नाई शान्तात्मा होकर स्थिर रहता हू