Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 82, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
मा कुरुध्वमनर्थाय चापलं चपलाशयाः ।
स्मरतातीतवृत्तीनि दुःखजालानि भूरिशः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मस्वरूप मेँ अवस्थित,
स्वस्थ अपने चित्त से भली प्रकार विचार करके सत्पुरुष अपने-अपने वर्ण ओर आश्रमो के अनुसार
प्राप्त हुए कर्मो में किसी प्रकार का उद्वेग किये बिना स्थित रहते हैं