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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 82, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

तत्रासने समे शुद्धे स्वास्तीर्णहरिणाजिने । विशश्रामाचले शान्ते वीतवर्ष इवाम्बुदः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे प्रकाश का उपराम हो जाने पर विभिन्न विभिन्नरूपों का प्रकाशन करनेवाली चक्षुआदि से जनित संवित्तियाँ विनष्ट हो जाती हैं, वैसे ही चित्त का उपराम हो जाने पर चंचल तृष्णा आदि दुर्गुण विनष्ट हो गये