Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 82, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 82, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 82 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
बद्धपद्मासनस्तस्थौ पार्ष्ण्योरधिकराङ्गुलिः ।
शृङ्गवच्छान्तचलनमतिष्ठत्स्पष्टकन्धरम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
मोहरूप पंजर भली प्रकार क्षीण हो गया, अहंभावना विशीर्णं हो गयी ओर इस अहंरूप आत्मा के
अज्ञानरूपी निद्रा से वर्जित होने पर मेने अपने स्वाभाविक स्वरूप को जान लिया