Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
तच्चेन्द्रियगणस्यार्थे श्रृणु वक्ष्यामि ते स्फुटम् ।
श्रुत्वा तद्भावनामेत्य परां निर्दुःखतां व्रज ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, विचारप्रचुर बुद्धि से
इसी दृष्टि का अवलम्बन कर आप इस संसारसागर के उत्तरोत्तर चित्त की विश्रान्ति के प्रकर्ष-परिपाक
से जनित भूमिका आरोहण क्रम से पार हो जाइये