Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
भवतामात्मसत्तैषा दुःखायैवान्तदायिनी ।
असत्यामात्मनः सत्तां तद्भवन्तस्त्यजन्त्विति ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, अब आप इस दूसरी इन्द्रिय ओर
मन की बोधरूपिणी दृष्टि का श्रवण कीजिए, जो परमपद को प्रदान करनेवाली है, इसी से महामुनि
वीतहव्य ने निःशंक परमपद को प्राप्त किया था