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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

मदीयेनोपदेशेन सत्तैषा भवतां क्षयम् । गतैवेति स्फुटं मन्ये यूयं ह्यज्ञानसंभवाः ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

पहले महान्‌ तेजस्वी वीतहव्य मुनि अरण्य मेँ समाधि के लिए अनुकूल विन्ध्य पर्वत की विस्तृत गुफा को खोजते हुए उस प्रकार परिभ्रमण कर रहे थे, जिस प्रकार सहम्रांशु (सूर्य) मेरु पर्वत की गुफाओं को खोजते हुऐ परिभ्रमण कर रहे हो