Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
प्रसन्नं स्फारगाम्भीर्यमक्षुब्धमपराहतम् ।
हृदयं समतामेति शान्तवात इवार्णवः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि हम लोग जड़ हैं, तो कौन दर्शन आदि से सब व्यवहारो को करता है 2 इस पर कहते हैं।
चिदात्मा भगवान्-स्वरूप मैं साक्षीरूप सब कुछ करता हूँ । हे जघन्य इन्द्रयवृन्द, तुम क्यों निरर्थक
व्याकुल हो रहे हो