Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
असति त्वयि सर्वाशिन्सर्वाशाक्षयसंक्षये ।
पक्षयोरेतयोश्चित्तसत्तासत्तास्वरूपयोः ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे शठ, “मे चेतनधर्मा हूँ” इस प्रकार की
तुम्हारी वासनारूपी भ्रान्ति मिथ्या ओर निरर्थक है, क्योंकि परस्पर एक दूसरे से अत्यन्त भिन्न धर्मवाले
चित् और मन की एकता नहीं हो सकती