Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 51
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हिन्दी अर्थ
हे चित्त, इस समय ब्रह्म से न तो तुम पृथक् हो और न देह ही पृथक है,
किन्तु व्यापक एवं प्रकाश स्वभाव ब्रह्म रूप ही सब हैं । चूँकि यहाँ “अहम्, “त्वम्” इस प्रकार का
व्यवहार क्रियारहित ब्रह्म में स्फुरित होता है, इसलिए किसको क्या दुःख होगा