Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 54
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
हे चित्त, मैं
बाल शरीर हूँ, मैं वृद्ध शरीर हूँ, बाल शरीर के सम्बन्धी क्रीड़ा के उपकरण आदि और वृद्ध शरीर के
सम्बन्धी पुत्र, पौत्र आदि मेरे हैं इस प्रकार निरर्थक इच्छा क्यों करते हो, क्योंकि आत्मस्वरूप हो
जानेवाले की दृष्टि में देह पारमार्थिक नहीं रहती, क्या असत्-शरीर यानी असत् स्वरूपवाला कहीं
प्रस्फुरित होता है ? यदि कहो कि हाँ, तो बतलाओ कि कौन खरगोश के सींग के द्वारा मारा गया