Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 59

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

यदि तुम करणों का स्वभाव ही अपना स्वभाव मानते हो, तो चलने में भी तुम्हारी स्वतः सामर्थ्य नहीं है, इसलिए तुम्हारा कर्तृत्व-अभिमान व्यर्थ ही है ऐसा उपपादन करते हैँ । स्वत:स्पन्दन-शक्ति से रहित, असत्‌-स्वरूपवाला तथा अवलम्बन वर्जित जड़रूप करण चैतन्य के द्वारा सम्पादित कर्तव्यार्थ-प्रकाश के बिना स्पन्दन नहीं कर सकता