Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 61
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हिन्दी अर्थ
हे चित्त, खड्ग प्रहार और तदुत्तरभावी छेदन क्रिया के लिए पुरुष
में ही शक्ति है। अत्यन्त जड़ तलवार में मूल से लेकर समस्त अवयवरूप उपकरणों के होते हुए भी
उक्त शक्ति नहीं रह सकती