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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 62

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 62

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हे मित्र, तुम कर्ता नहीं हो, इसलिए निरर्थक दुःखभागी मत होओ । हे मूर्ख, पामर के सदृश प्रकृति के कार्यो मे दूसरे के लिए क्लेश सहन शोभा नहीं देता