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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 69

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 69 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 69

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

तब उस परमात्मा के ही साथ सम्बन्ध स्थापन कर मैं उसके अनुग्रह से भोगो को प्राप्त करूँगा। इस पर कहते हैं। (आत्मा के साथ सम्बन्ध बाँधने की इच्छा के कारण) हे सुन्दर चित्त, तुम आत्मा के साथ अपना सम्बन्ध करने की इच्छा रखते हो, परन्तु तुम उसके सम्बन्धी यानी सम्बन्ध के योग्य उसी प्रकार नहीं हो सकते, जिस प्रकार कुसुम के सम्बन्ध के योग्य फल नहीं हो सकता | तात्पर्य यह है कि कुसुम से उत्पन्न हुआ भी फल कुसुम से बहिर्मुख होने के कारण कुसुम में रहनेवाले सुगन्धि आदि के उपभोग हेतु सम्बन्ध के योग्य नहीं होता, क्योंकि फल की अभिवृद्धि होने पर कुसुम का तिरोभाव हो जाता है, इसी प्रकार यहाँ भी समझ लेना चाहिए