Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 83, Verse 78
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 83, verse 78 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 83 · श्लोक 78
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हिन्दी अर्थ
जैसे समुद्र अपने अन्दर जलस्वरूप फेन, बुद्बुद् ओर तरंगों से स्फुरित होता हे, वैसे ही आभासमात्र
स्वरूप सर्वात्मक इस चिदात्मा में जगत् स्फुरित होता है