Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
सिंहसंरम्भरटितैर्निर्झरारावसीत्कृतैः ।
विषमाशनिसंपातैर्जनकोलाहलैर्घनैः ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
चोंच से शम, दम, धर्मादि फलों के पुष्परूपी गुण समूहों को कतर रहा है