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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

महोपलतटाघातैर्धरणीतलमृज्जलैः । जलौघान्दोलनायातैस्तापैरनलकर्कशैः ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

मोहरूपी महारात्रि मे भयावह अज्ञानरूपी उल्लू हृदयरूपी वृक्ष के ऊपर श्मशान में वेताल की नाई चारो ओर से गरज रहा हे