Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
केवलं वहति स्वैरं काले गलितकारणम् ।
परियान्तीषु वर्षासु लहरीष्विव वारिणि ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे इन्द्रियगण, आप लोगों के विद्यमान रहते ये ओर इनसे दूसरी भी बहुत सी अशुभ-श्रियाँरात्रि में
पिशाचिनियों की नाई गरजती रहती हैं