Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
उत्पत्तिप्रौढिमासाद्य कलना हृदयान्तरे ।
स्वमनोरूपिणी तस्य हृद्येवानुबभूव सा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
भीतर से छिद्रवाली यानी
अपूर्णता से युक्त तथा जडता से भरे मूर्खो मे विद्या, कौशल आदि गुणों का सम्बन्ध करानेवाली चिन्ता
उस प्रकार सूख रही है, जिस प्रकार हिमदग्ध कमलिनी