Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
अपरिस्पन्दिताशेषसंविदानन्दसुन्दरः ।
बभावस्तंगतमनाः स्तिमिताम्भोधिशोभनः ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, इन्द्रियों के लिए उक्त मुनि वीतहव्य ने एकान्त में स्थित होकर जो बोध-प्रदान किया था,
उसको मैं आप से स्पष्ट कहता हूँ , उसे श्रवण कीजिये । श्रवण करने से आप उस भावना को प्राप्त
होकर मुक्त हो जाइए