Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
शक्रत्वादिषु तेष्वस्य प्रतिभासेषु भो मुने ।
नियमोऽनियमश्चैव दिक्कालनियतेः कथम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मारामरूपी अमृत-
प्रवाह से पूर्ण तथा अविनाशी आनन्द से प्रचुर पुरुष शीतलता से युक्त होकर भीतर उस प्रकार स्थित
रहता है, जिस प्रकार शीतल चन्द्रमा