Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
विद्याधरत्वं वर्षाणां शतमाधिविवर्जितम् ।
युगपञ्चकमिन्द्रत्वं प्रणतं सुरचारणैः ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
वायु के शान्त होने पर
समुद्र जैसे समता को प्राप्त करता है, ऐसे ही प्रसन्न, विशाल गाम्भीर्य से युक्त, क्षोभशून्य तथा विषमता
के सम्पादक हेतुओं से पराजित न हुआ मन समता को प्राप्त करता है