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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 24

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

यथा यत्र यदा बुद्धौ नियमः स तदा स्थितः । देशकालादिनियमक्रमाणां तन्मयात्मता ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

केवल संविन्मात्र मे विश्रान्ति हो जाने पर आत्मस्वरूप का, जो निरतिशय आनन्द से व्याप्त है, पूर्णरूप से अनुभव होता है, परन्तु यह अनुभव आशारूपी फॉाँसी को उत्पन्न करनेवाले प्राण-सम्बद्ध देह आदि विद्यमानता-दशा में नहीं होता , अथवा संविदेक- विश्रान्ति हो जाने पर शरीर ब्रह्मानन्द के आविर्भाव से मन्थर (भारी) होकर मानों अमृत के प्राशन से भरिताकार (पूर्णरूप) अनुभूत होता है, परन्तु यह अनुभव अन्न, पान आदि आशारूपी पाशो का निर्माण करनेवाले आसक्ति-प्रयोजक प्राण आदि पापों की विद्यमानता-दशा में नहीं होता