Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 27
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 27 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
कल्पमेकं गणत्वं स चन्द्रमौलेश्चकार ह ।
समस्तविद्यानिपुणं त्रिकालामलदर्शनम् ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे सर्वभक्षक चित्त, समस्त आशारूपी क्षयरोग को आश्रय देनेवाले
तुम्हारे अस्तित्व के मिट जाने पर (सर्वविध गुण प्राप्त हो जाते हैं, यह बात निश्चित हुई) हे चित्त, अब
तुमसे कहता हूँ कि इन दो पक्षों मे से यानी आत्यन्तिक आत्मभाव से स्थिति ओर आत्यन्तिक निरात्मत्व
का स्वीकार इन दोनों पक्षों में से तुम जिस किसी पक्ष से अपना कल्याण देखो उसीका क्षण भर में
आश्रय ले लो