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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

यो यादृग्दृढसंस्कारः स तं पश्यति तादृशम् । जीवन्मुक्ततयैवैतद्वीतहव्योऽनुभूतवान् ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

मैं तो यह मानता हूँ कि हे मानियों में श्रेष्ठ चित्त, आत्यन्तिक आत्मभाव से स्थित ही तुम्हारे लिए सुख प्रद है । अतः हे चित्त, तुम उसी अभाव की (भावान्तर शून्य आत्म स्थिति की) भावना करो, क्योकि सुख का त्याग करना महामूर्खता है