Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 45
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 45 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 45
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हिन्दी अर्थ
यह आत्मा है, मैं तत्स्वरूप ही हूँ, मुझसे पृथक् दूसरा कुछ भी कहीं नहीं है प्रकाशमान चित्स्वरूप
बोधात्मा मैं ही सदा सर्वत्र रहता हूँ