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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 46

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 46

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

शुद्धचिदेकरस आत्मा में यह आत्मा है“ इस प्रकार की जब कल्पना ही नहीं हो सकती, तब दूसरी कल्पनाओ के विषय में तो कहना ही क्या ? इस आशय से कहते हैं। सर्वविध मलों से वर्जित आत्मा के अन्दर "यह आत्मा है" इस प्रकार की कल्पना ही नहीं हो सकती, यह मैं मानता हूँ, क्योंकि यह एक अद्वितीय आत्मा में प्रतियोगी के भेद से होनेवाली यानी अन्य वस्तु की सत्ता से होनेवाली कल्पना कैसे हो सकती है