Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 84, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 84, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 84 · श्लोक 47
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हिन्दी अर्थ
इसलिए परमात्मा वाणी का भी अविषय है, ऐसा कहते हैं।
उसी कारण से यानी अद्वितीय वस्तु में कोई कल्पना नहीं हो सकती, इस कारण से “मैं यह आत्मा
हूँ" इस प्रकार कल्पना के अभिव्यंजक शब्दों का उच्चारण न करता हुआ मैं मौनी होकर उस प्रकार
अपने स्वरूप में स्थित रहता हूँ, जिस प्रकार जल में तरंग