Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 36
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 36
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार उस समय पृथ्वी के
सौराष्ट् प्रदेश में जो आत्मज्ञान से रहित राजा था, वही आज आन्ध्रदेश के एक गाँव मेँ अवस्थित है,
जहाँ अनेकविध वृक्ष हैं