Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 35
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 35
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हिन्दी अर्थ
पितामह के पाद्यकल्प के
समय, जबकि मुनि वीतहव्य शिवजी के गणों के अधिपति थे, उनकी क्रीडा के लिए आत्मबोध से शून्य
जो हंस था, वही इस समय निषादो का राजा होकर स्थित है