Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 85, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 85, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 85 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
शरीरं वीतहव्याख्यं धराकोटरपीडितम् ।
प्रावृडोघोपनीतं तत्पृष्ठस्थपङ्कमण्डलम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाबुद्धि वीतहव्य ने अपने आसनबन्ध में शरीर, शिर और ग्रीवा
को समानरूप से रक्खा था, इसलिए वे ऐसे मालूम पड़ते थे, जैसे पर्वत से खोदी गई अथवा चित्र में
लिखी गई मूर्ति हो