Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
गच्छतस्तिष्ठतश्चैव तस्यैवमभवद्धृदि ।
विनोदाय विचित्तस्य कथा स्वमनसा सह ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामते उस प्रकार मन से विचार कर महामुनि वीतहव्य क्षणभर भूतल में चुपचाप बैठकर फिर
विचार करने लगे