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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 12

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

अव्ययेन्द्रियवर्गेश मनः शमवता त्वया । पश्यानन्दसुखं कीदृग्विधमासादितं ततम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

मुझे देह का त्याग न तो उपादेय (अपेक्षणीय ) है और न देह का आश्रय ही उपादेय है, क्योकि जैसे देह का परित्याग है, वैसे ही देह का समाश्रय है, दोनों में कुछ भी अन्तर नहीं है