Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
एषैवाविरतं तस्मान्नीरागैव दशा त्वया ।
अवलम्ब्या परित्याज्यं चापलं चलतां वर ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए जब तक यह शरीर है और जब तक वह अणु परमाणु रूप नहीं बन जाता, तब तक मैं
इसका आश्रय कर कुछ विहार कर लूँ