Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
हेयादेयसमासङ्गत्यागादानदृशोः क्षये ।
वीतहव्यमुनेरासीदिच्छानिच्छातिगं मनः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
विकसित कमलो से युक्त उस सरोवर में मुनि वीतहव्य ने तुरंत उस प्रकार मज्जन किया, जिस
प्रकार कीचड़ से भरे तालाब में क्रीडा के अनन्तर हाथी का बच्चा वन मेँ मज्जन करता हो