Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
पूर्वमेवेन्द्रियगणो मया परिहृतः स्फुटम् ।
इदानीं चिन्तया नार्थः पुनर्विततया मम ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
जब वह महादेवजी के गण थे, तब किसी समय चिदात्मा का ध्यान करते
समय उनकी यह इच्छा हुई कि मेँ पहले अपने समस्त जन्मों का अवलोकन करूँ