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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

अस्तिनास्तीतिकलनां भङ्क्त्वा मृद्वीं लतामिव । शेषं तु बद्धसंस्थानस्तिष्ठाम्यचलश्रृङ्गवत् ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

तदन्तर उन्होने कुछ नष्ट हुई और कुछ नष्ट न हुई अपनी समस्त देहो को प्रत्यक्ष देखा | देखने के बाद जो शरीर नष्ट नहीं हुए थे उनके मध्य में तत्‌-तत्‌ कोटर में अवस्थित यही तत्‌-तत्‌ अनष्ट देहों के हृदय कोटर में जीवट के उपाख्यान में कही जानेवाली रीति के अनुसार अपनी कल्पना से ही अवस्थित वीतहव्य शरीर का उद्धार करने के लिए अकस्मात्‌ ही उनकी इच्छा हुई