Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
स्थितः स्थाणुरिवैकान्ते स्वान्तान्ते सर्वतः स्थिते ।
सत्त्वसामान्यसाम्ये हि तिष्ठाम्यपगतामयः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
महान् तेजस्वी वीतहव्य ने इस प्रकार धरा के विवर में पीड़ित अपनी देह को देखकर उत्तम बोध से
युक्त बुद्धि से पुनरपि विचार किया