Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 86, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 86, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 86 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
इति संचिन्त्य स ध्याने पुनस्तस्थौ दिनानि षट् ।
ततः प्रबोधमापन्नः क्षणसुप्त इवाध्वगः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण अवयवों मे पीडा होने के कारण प्राणवायु से यानी
प्राण-संचारों से निर्मुक्त मेरी देह चलने-फिरने में तथा कुछ करने में तनिक भी समर्थ नहीं हे