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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 14

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 14

संस्कृत श्लोक

ततः सुषुप्तसंस्थानं स्थित्वा स्थित्वा विभुर्मनाक् । सुषुप्ते स्थैर्यमासाद्य तुर्यरूपमुपाययौ ॥ १४ ॥

हिन्दी अर्थ

हे इन्द्रिय नाम को धारण करनेवाले चोर और हे नष्ट आशावृन्द, यह मेरे द्वारा अनुभूयमान आत्मा तुम्हारा नहीं है और तुम लोग आत्मा के नहीं हो