Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
पश्यन्तीपदमासाद्य सत्तामात्रात्मके ततः ।
प्रसुप्तपदमालम्ब्य तस्थौ गिरिरिवाचलः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
सर्वश्रेष्ठ मन, इसलिए तुमको आगे भी इस रागशून्य दशा का ही अवलम्बन करना चाहिए और अपनी
चंचल वृत्ति का परित्याग कर देना चाहिए