Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 87, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 87, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 87 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
अजमजरमनाद्यनेकमेकं पदममलं सकलं च निष्कलं च ।
स्थित इति स तदा नभःस्वरूपादपि विमलस्थितिरीश्वरः क्षणेन ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी जिस पद के प्राप्त होने पर पुनर्जन्म के लिए चिन्ता विनष्ट
हो जाती है ओर मूढता कोसों दूर भाग जाती है,उस परम पूर्णानन्द स्वप्रकाशरूप पद में निरन्तर ये मुनि
अवस्थित थे